Tuesday, August 16, 2005

शर्मिंदा कर रही दो ख़बरें


दो ख़बरें सुनने-पढ़ने मिलीं. पहली यह कि एक निजी ख़बरिया चैनल के कुछ कर्मियों ने शराब के नशे में बार कर्मियों और पुलिसवालों के साथ मारपीट की. दूसरी यह कि नेताओं की पोल खोलने का दावा करने वाले एक प्रोडक्शन हॉउस की इमारत पर १४ की शाम से लेकर १६ अगस्त की सुबह तक तिरंगा लहराता रहा. देश-दुनिया के लोगों को जागरूक करने और समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास कराने का दावा करने वाले मीडियाकर्मियों के लिए दोनों ख़बरें शर्मनाक हैं. कुछ अरसे पहले ऐसी ही एक ख़बर पढ़ने मिली थी जब सबसे तेज़ होने का दावा करने वाले ख़बरिया चैनल के एक नामी ख़बरनवीस छावनी इलाक़े के नो-पार्किंग ज़ोन में अपनी कार खड़ी करने पर आमादा हो गया और नशे में धुत इस ख़बरनवीस ने ड्यूटी पर तैनात सैनिक से मारपीट की.
अक्सर सुनते आए हैं कि सत्ता का नशा सर चढ़कर बोलता है. इन्हे कौन सा नशा चढा? सत्ता के गलियारों में गूंजती इनकी धमक क्या अब आमजनों का जीना मुहाल करेगी? बैलगाड़ी के नीचे चल रहे कुत्ते को अक्सर ये गुमां हो जाता है कि सारा बोझ उसके कंधों पर है. नीर-क्षीर विवेकी लोगों से मेरी गुज़ारिश है ऐसा कोई भ्रम ना पालें कि हम संविधान और क़ानून से बड़े हो गए हैं.

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