tag:blogger.com,1999:blog-14977646.post112386503140038405..comments2008-05-11T09:45:28.666-07:00Comments on की-बोर्ड का रिटायर्ड सिपाही: बर्बाद तमन्ना पे अताब और ज़्यादाNeeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comBlogger2125tag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123926459116912892005-08-13T02:47:00.000-07:002005-08-13T02:47:00.000-07:00विनय के कहे मुताबिक़ यहां मौक़ूफ़ के मायने बदल दिए गए...विनय के कहे मुताबिक़ यहां मौक़ूफ़ के मायने बदल दिए गए हैं. शुक्रिया विनयNeerajhttp://www.blogger.com/profile/14728892885258578957noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123885872744107782005-08-12T15:31:00.000-07:002005-08-12T15:31:00.000-07:00नीरज:चन्द लफ़्ज़ों में बड़ा अच्छा परिचय दिया आपने मजा...नीरज:चन्द लफ़्ज़ों में बड़ा अच्छा परिचय दिया आपने मजाज़ का। शुक्रिया। मौक़ूफ़ का एक मतलब 'निर्भर' या 'dependent' भी होता है। तीसरे शे'र में मेरे खयाल में यही मतलब ज़्यादा प्रासंगिक है। क्या कहते हैं? क़मर जलालवी का एक शे'र सुनिये - लिखी है ख़ाक उड़ानी ही अगर अपने मुक़द्दर में तेरे कूचे पे क्या मौक़ूफ़, वीराने बहुत से हैंVinayhttp://www.blogger.com/profile/13441809988487585009noreply@blogger.com