tag:blogger.com,1999:blog-149776462007-11-16T06:32:09.813-08:00की-बोर्ड का रिटायर्ड सिपाहीNeeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comBlogger27125tag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1148405509504630172006-05-23T10:24:00.000-07:002006-05-23T10:31:49.513-07:00और मैं रिटायर हो गयातकनीकी कारणों से इस चिट्ठे पर अब कोई नया लेख प्रकाशित नहीं होता. या यूं कहे की-बोर्ड का यह सिपाही अब रिटायर किया जा चुका है. कृपया की-बोर्ड के नए सिपाही पर लौटें..यहां क्लिक करें Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1124211199485376142005-08-16T09:36:00.000-07:002005-08-16T10:36:24.816-07:00शर्मिंदा कर रही दो ख़बरें दो ख़बरें सुनने-पढ़ने मिलीं. पहली यह कि एक निजी ख़बरिया चैनल के कुछ कर्मियों ने शराब के नशे में बार कर्मियों और पुलिसवालों के साथ मारपीट की. दूसरी यह कि नेताओं की पोल खोलने का दावा करने वाले एक प्रोडक्शन हॉउस की इमारत पर १४ की शाम से लेकर १६ अगस्त की सुबह तक तिरंगा लहराता रहा. देश-दुनिया के लोगों को जागरूक करने और समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास कराने का दावा करने वाले मीडियाकर्मियों के Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1124044136401363832005-08-14T11:21:00.000-07:002005-08-15T05:23:42.210-07:00मै आज़ाद हूं भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश (७१ के पहले पूर्वी पाकिस्तान) की आज़ादी का दिन १४-१५ अगस्त हमें यह याद दिलाता है कि हम आज़ाद हो चुके हैं. मुझे ये कहने में कतई संकोच नहीं कि बेशक़ हम आज़ाद हुए हैं लेकिन आज़ादी के दीवानों ने ऐसे देश का सपना नहीं देखा था. आज इतना बड़ा पाखंड इन देशों के सियासतदानों ने खड़ा कर लिया है कि लोकतंत्र दम तोड़ता नज़र आता है. पाकिस्तान और बांग्लादेश का छोड़ दें क्योंकि ये देशNeeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1124108907105764582005-08-14T05:24:00.000-07:002005-08-15T10:56:35.980-07:00आज़ादी के दीवाने पंजाब केसरी में आज स्वाधीनता दिवस पर प्रकाशित ये कार्टून बहुत कुछ कह रहा है.Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123955689994542842005-08-13T10:47:00.000-07:002005-08-13T10:54:50.000-07:00द राइज़िंग- प्रशंसनीय प्रयास निष्णात् सिने-समीक्षक जयप्रकाश चौकसे (इंदौर वाले) का ताज़ा लेख जो आमिर ख़ान की फ़िल्म द राइज़िंग पर केंद्रित है – आपके लिए यहां जस का तस प्रकाशित कर रहा हूं – उम्मीद है कि चौकसे की लेखन-शैली भी रूचिकर लगेगी. द राइज़िंग- प्रशंसनीय प्रयास संत रामदास के कथा वाचन की प्रशंसा सुनकर स्वयं श्री हनुमान साधारण आदमी के वेष में कथा सुनने पहुंचे. प्रसंग था अशोक वाटिका में शोक संतप्त सीता की व्यथा का. Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123865031400384052005-08-12T08:58:00.000-07:002005-08-13T02:45:19.333-07:00बर्बाद तमन्ना पे अताब और ज़्यादामजाज़ को जाने..समझने का दावा बिना पढ़े कतई ना करें छोटा-सा परिचय - उत्तरप्रदेश के बाराबांकी ज़िले के रुदौली में १९०९ में जन्में असरार उल हक़ की शुरूआती तालीम लखनऊ और बाद आगरा में हुई. १९३६ में आपने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से बीए किया. ये वो दौर था जब अलीगढ़ यूनीवर्सिटी में प्रगतिशील आंदोलन की शुरूआत हुई थी. मजाज़ खुद इससे प्रभावित थे. आपने ऑल इंडिया रेडियो में भी काम किया लेकिन बाद किन्हीं Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123609878629210972005-08-09T10:42:00.000-07:002005-08-09T11:32:05.196-07:00एक हफ़्ते की माथापच्ची के बाद आज इन्स्क्रिप्ट की-बोर्ड पर यूनीकोड फॉट टाइप करने का तरीका आ ही गया... सलाह के लिए जीतेंद्र और रमन कौल को साधुवाद. माइक्रोसाफ्ट का इण्डिक आइ-एम-ई लोड कर लिया है. बड़ी मशक़्क़त के बाद चलाना भी सीख लिया. यार ख़बरनवीस हूं मुझे तकनीक की इतनी समझ कहां ? नेटसाधुओं को एक बार फिर साधुवाद. जिनको इंस्क्रिप्ट की-बोर्ड में यूनीकोड फॉट पर हिन्दी टाइप करना हो तो ये बढ़िया संपादक हैNeeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123521752270365392005-08-08T10:15:00.000-07:002005-08-09T02:34:17.280-07:00क़ातिल का फ़ैसला है ख़ुद क़ातिल के हाथ. दिल्ली और गुजरात - १९८४ और २००२ सोमवार ८ अगस्त को सिख दंगों की जांच के लिए बने नानावटी आयोग की रिपोर्ट देश की संसद के पटल पर रखी गई. ८४ के दंगों में अकेली दिल्ली में तीन हज़ार सरदार मारे गए थे. वेद मारवाह कमेटी से नानावटी आयोग तक कुल नौ आयोग और कमेटियां बन चुके हैं और तीन हज़ार लोगों की हत्या के लिए सिर्फ़ नौ लोगों को अब तक दोषी क़रार दिया गया है. यानी हमारी वो सरकार जो ८४ से लेकर ८९ और फिर ९१ से Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123440190603499592005-08-07T10:53:00.000-07:002005-08-28T09:35:09.330-07:00ऐ ग़म ए दिल क्या करूं सागर के कहने पर वो नज़्म जो मजाज़ की लिखी है, मै यहां लिख देता हूं. बाद ये तय हो जाएगा कि यक़ीनन मजाज़ पर प्रगतिशील लेखन का ज़बर्दस्त असर पडा. जगजीत जी ने इसके चंद शेरों को अपनी आवाज़ दी थी.. असरार उल हक़ 'मजाज़' की ये नज़्म आप पढें. इस ग़ज़ल के चंद शेर यहां तरन्नुम में सुनें - शहर की रात और मैं नाशाद-ओ-नाकारा फिरूं जगमगाती जागती सडकों पे आवारा फिरूं ग़ैर की बस्ती है कब तक दर-बदर मारा फिरूं ऐ ग़म ए दिल Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123421120810080202005-08-07T06:24:00.000-07:002005-08-07T06:25:20.813-07:00दोस्ती जब किसी से की जाएदोस्ती जब किसी से की जाए, दुश्मनों की भी राय ली जाए. मौत का ज़हर है फिज़ाऒ में, अब कहां जा के सांस ली जाए. बस इसी सोच में डूबा हुआ, ये नदी कैसे पार की जाए. मेरे माज़ी के ज़ख़्म भरने लगे, आज फिर कोई भूल की जाए. बोतलें खोलके तो पी बरसों, आज दिल खोल कर पी जाए. (माज़ी - past, old days)Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123352394017535392005-08-06T11:09:00.000-07:002005-08-06T11:19:54.020-07:00मेरे अपने मुझे नफ़रत की सज़ा देते हैंFriendship Day को दोस्ती की यादगार कहो या दोस्त बनाने का बेहतरीन मौक़ा. अपना तजुर्बा हमेशा ही उल्टा रहा है कुछ इन ग़ज़लों की तरह. अपने में ही रही होगी कोई कमी.. तभी इस कम्ब्ख़त को ये सब रोना - धोना याद आ जाता है. आप भी हमख़्याल हो तो दो आंसू आप भी बहा लीजिए.. पहले ये शेर पढिए- मैने दुश्मन को भी अहसास-ए-मोहब्बत बख़्शा मेरे अपने मुझे नफ़रत की सज़ा देते हैं. ये है वो ग़ज़ल (सुनने के लिए यहां क्लिक करें) Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123353259393731562005-08-06T10:23:00.000-07:002005-08-06T11:35:02.183-07:00दोस्त बन-बन के मिले मुझको मिटाने वाले(सुनने के लिए यहां क्लिक करें) दोस्त बन-बन के मिले मुझको मिटाने वाले, मैने देखे हैं कई रंग बदलने वाले. तुमने चुप रहके सितम और भी ढाया मुझ पर, तुमसे अच्छे हैं मेरे हाल पर हंसने वाले. मैं तो इख़लाक़ के हाथों ही बिका करता हूं, और होंगे तेरे बाज़ार में बिकने वाले. आख़री बार सलाम दिल-ए-मुज़्तर ले लो, फिर ना लौटेंगे शब ए हिज्र पे रोनेवाले. - सईद राहीNeeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123330893389789622005-08-06T05:05:00.000-07:002005-08-06T05:22:40.966-07:00मित्र ऐसे कि ख़ून के रिश्ते फीकें पड जाऎ मित्र बनाने और आजीवन निभाने की परंपरा (छतीसगढ की मिट्टी से ही मैं आया हूं लिहाज़ा Friendship Day पर यह आलेख प्रासंगिक बन पडा है. पूरा आलेख पढने के लिए यहां क्लिक करें ) भारत में फ़्रेंडशिप डे मनाने की प्रथा भले आज चलन में आई हो, छत्तीसगढ़ में मित्र बनाने और मित्रता निभाने की एक लंबी सांस्कृतिक परम्परा रही है. अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाने वाला फ़्रेंडशिप डे तो एक दिन का मामला है लेकिन Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123334188335784892005-08-06T03:10:00.000-07:002005-08-06T06:16:28.340-07:00अब दिल का दर्द लेकरकल अख़बार में शकील बदायुनी का ये शेर पढा, भा गया, आप भी देखें अब दिल का दर्द लेकर इन्क़लाब आया तो क्या, एक दोशीज़ा पर ग़ुरबत में शबाब आया तो क्या. अब तो आंखों पे ग़म - ए - हस्ती के पर्दे पड गए, अब कोई हुस्न- ए- मुज़स्सिम बेनक़ाब आया तो क्या. (दोशीज़ा- लडकी; ग़ुरबत- ग़रीबी; हुस्न-ए-मुज़स्सिम-सिर से लेकर पैर तक)Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1124125433354809882005-08-05T09:55:00.000-07:002005-08-16T10:28:44.316-07:00आज कहां-क्या होगा?ख़बरों की दुनिया में आगे रहने की बातें तो सभी करते हैं. की-बोर्ड के इस सिपाही ने अपने साथियों की सहूलियत के लिए एक नई कोशिश की है. आज से रोज़ाना हमारे साथियों को आनेवाले दिन की घटनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी. मेरी यह कोशिश ख़ासकर मेरे उन साथियों के लिए फ़ायदेमंद होगी जो स्वदेस से बाहर हैं या फिर वक़्त की कमी के चलते ख़बरों को पूरी तरह पढ़/देख नहीं पाते. पूरी सामग्री हिन्दी में लिखने में Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123087454687601212005-08-03T09:41:00.000-07:002005-08-03T09:46:46.780-07:00हम सब की बात है..मुझे अब तक ये अनुभव रहा कि हिंदी को दोयम दर्ज़े का माना जाता है. यहां आकर अहसास हुआ कि हक़ीक़त ये नहीं है बिलकुल नहीं. आप लोग जो यक़ीनी तौर पर उम्दा तालीमयाफ़्ता होंगे - से जो प्रतिसाद मेरे ब्लाग को शुरुआत में मिला है, इसके लिए आभारी हूं. आज मेरे साप्ताहिक अवकाश का दिन है लिहाज़ा ज़्यादा नहीं लिख रहा हूं. सामाजिक सरोकार और इससे हमारी चिंता सहज और स्वाभाविक है. कहूं तो इतनी टीप पढकर मेरी आंख से एक आंसू Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1123005984524751602005-08-02T09:36:00.000-07:002005-08-02T11:06:24.530-07:00उधारीकरण में उधडी कामगारों की खाल गुडगांव की होण्डा मोटर साइकिल ऎड स्कूटर इंडिया के एक हज़ार से ज़्यादा कर्मचारी २५ जुलाई को उदारीकरण के घिनौने स्वरूप का शिकार बने. पूंजीवाद के सरमायेदारों ने उस काले सोमवार को इन कर्मियों की खालों को जमकर उधेडा. इसी दिन दुनिया ने देखा कि कैसे चन्द उद्योगपतियों के इशारे पर प्रशासन तांडव करता है. कैसे श्रम शर्मसार किया जाता है. कैसे हमारे राजनेता गरम तवों पर रोटियां सेंकते हैं. पहले कंपनी ने Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1122996050989175312005-08-02T08:10:00.000-07:002005-08-02T08:20:50.993-07:00क्या होता है ब्लू टूथ ?क्या होता है ब्लू टूथ ? अरे भाई सब जानते हैं इस्तेमाल का तरीक़ा लेकिन ये होता क्या है ये भी तो जान लीजिए.. बस एक बार मेरा कहा मान लीजिए. दरअसल, डेनमार्क का एकीकरण करने वाले राजा हेराल्ड ब्लू टूथ के नाम पर बनी यह टेक्नॉलाजी सूचना के बेतार आदान-प्रदान में मदद करती है. इस टेकनॉलाजी पर आधारित उपकरण शॉर्ट रेडियो लिंक की मदद से आपस में बात करते हैं. मान लीजिए कि आप अपने मोबाइल फोन में पड़े फ़ोन नंबर Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1122825043821118182005-07-31T08:44:00.000-07:002005-07-31T09:43:29.416-07:00तुम मुझे यूँ भुला न पाओगे... रफी साहब - ३१ जुलाई पुण्यतिथि पर विशेष गीत यहां सुनें जब कोई यह सवाल करता है कि आपको मोहम्मद रफ़ी का कौन सा गाना सबसे ज़्यादा पसंद है तो एक धर्मसंकट सा खड़ा हो जाता है. रफ़ी साहब के हज़ारों गानों में से किसी एक गाने को सबसे ज़्यादा अच्छा कहना क्या वाक़ई मुमकिन है. रफ़ी साहब ने क़रीब 26 हज़ार गाने गाए जिनमें हर रंग, मिज़ाज़, मूड को उन्होंने इस बख़ूबी से अपनी आवाज़ में उतारा कि कोई भी संगीत Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1122823732693522992005-07-31T08:27:00.000-07:002005-07-31T10:19:05.826-07:00आज हम बिछडे हैं (ग़ज़ल यहां सुनें) आज हम बिछडे हैं तो कितने रंगीले हो गए, मेरी आंखे सुर्ख, तेरे हाथ पीले हो गए. कब की पत्थर हो चुकी हैं मुन्तज़िर आंखें मगर, छू के जब देखा तो मेरे हाथ गीले हो गए. जाने क्या एहसास साज़ ए हुस्न के तारों में है, जिनको छूते ही मेरे नग़में रसीले हो गए. अब कोई उम्मीद है 'शाहिद' ना कोई आरजू, आसरे छूटे तो जीने के वसीले हो गए. आज हम बिछडे हैं तो कितने रंगीले हो गए, मेरी आंखे सुर्ख, तेरे Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1122820378362708152005-07-31T07:29:00.000-07:002005-07-31T10:21:29.463-07:00आपके हसीन रुख पे.. (गीत यहां सुनें) आपके हसीन रुख पे आज नया नूर है, मेरा दिल मचल गया तो मेरा क्या कुसूर है. आपकी निगाह ने कहा तो कुछ ज़रूर है, मेरा दिल मचल गया तो मेरा क्या कुसूर है. खुली लटों की छांव में खिला - खिला ये रूप है, घटा पे जैसे छन रही सुबह - सुबह की धूप है. जिधर नज़र मुडी , उधर सुरूर ही सुरूर है. मेरा दिल मचल गया तो मेरा क्या कुसूर है. झुकी - झुकी निगाह में भी हैं बला की शोखियां, दबी - दबी हंसी में Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1122831487754774072005-07-31T06:34:00.000-07:002005-07-31T10:38:36.906-07:00बेकार हमें गम़ होता है..(जगजीत जी की सहराना आवाज़ में ग़ज़ल यहां सुनें) सच ये है बेकार हमें गम़ होता है जो चाहा था दुनिया में कम होता है ढलता सूरज फैला जंगल रस्ता गुम हमसे पूछो कैसा आलम होता है ग़ैरों को कब फ़ुर्सत है दुख देने की जब होता है कोई हम-दम होता है ज़ख्म़ तो हम ने इन आंखों से देखे हैं लोगों से सुनते हैं मरहम होता है ज़हन की शाख़ों पर अशआर आ जाते हैं जब तेरी यादों का मौसम होता हैNeeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1122830933840211862005-07-31T06:23:00.000-07:002005-07-31T10:28:53.840-07:00चांदनी छत पे चल रही होगी चांदनी छत पे चल रही होगी अब अकेली टहल रही होगी फिर मेरा ज़िक्र आ गया होगा वो बऱ्फ-सी पिघल रही होगी कल का सपना बहुत सुहाना था ये उदासी न कल रही होगी सोचता हूं कि बन्द कमरे में एक शमा-सी जल रही होगी तेरे गहनों सी खनखनाती थी बाजरे की फ़सल रही होगी जिन हवाओ ने तुझ को दुलराया उन में मेरी ग़जल रही होगी -दुष्यन्त कुमारNeeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1122831162397161002005-07-31T05:30:00.000-07:002005-07-31T10:32:42.396-07:00ख्व़ाब का चर्चा न करोदेख लो ख्व़ाब मगर ख्व़ाब का चर्चा न करो लोग जल जायेंगे सूरज की तमन्ना न करो वक़्त का क्या है किसी पर भी बदल सकता है हो सको तुम से तो तुम मुझ पे भरोसा न करो किर्चियां टूटे हुए अक्स की चुभ जायेंगी और कुछ रोज़ अभी आईना देखा न करो अजनबी लगने लगे खुद तुम्हें अपना ही वजूद अपने दिन रात को इतना भी अकेला न करो ख्व़ाब बच्चों के खिलौनों की तरह होते हैं ख्व़ाब देखा न करो ख्व़ाब दिखाया न करो बेख्याली मेंNeeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-14977646.post-1122832382950841112005-07-31T04:42:00.000-07:002005-07-31T11:00:38.610-07:00कोई चौदहवीं रात का चांद बन कर.. (ग़ज़ल यहां सुनें) कोई चौदहवीं रात का चांद बन कर तुम्हारे तसव्वुर में आया तो होगा, किसी से तो की होगी तुमने मुहब्बत किसी को गले से लगाया तो होगा. तुम्हारे ख़यालों की अंगनाईयों में मेरी याद के फूल महके तो होंगे, कभी अपनी आंखों के काजल से तुमने मेरा नाम लिख कर मिटाया तो होगा. लबों से मुहब्बत का जादू जगाकर भरी बज़्म में सब से नज़रें बचा कर, निगाहों की राहों से दिल में समा कर किसी ने Neeraj नीरज نیرجnoreply@blogger.com